माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति से जुड़ी कविता हिंदी में...🙏
माहेश्वरी समाज
की उत्पत्ति से जुड़ी कविता
हिंदी में...🙏
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🙏जय महेश🙏
सेवा, त्याग ,सदाचार,
माहेश्वरी समाज का आधार!!
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ज्येष्ठ मास सुदी नवमी
को माहेश्वरी जाती का
उत्पत्ति दिवस आया,
भगवान महेश का आशीष
सभी माहेश्वरीयो ने पाया!!
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सुनाती हूं में विवरण
कैसे किया हमने माहेश्वरी
गोत्र का वरण!!
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खंडेला नगर में सूर्यवंशी
खडगल सेन थे राजा,
उनके राज्य में सुखी
और प्रसन्न थी प्रजा!!
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निपुत्र होने की चिंता राजा
को हरदम सताती,
शिव उपासना से रानी
चंपावती को प्राप्त हुई पुत्र
रूपी संतति!!
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राजकुमार सुजान कुंवर
मिला नवजात को नाम,
नामकरण पर ब्राह्मणों ने
चेताया राजा को रखना
इस बात का विशेष ध्यान,
16 वर्ष की उम्र तक उत्तर
दिशा में पराक्रमी कुंवर ना
जाने पाए,
परंतु प्रारब्ध रेखा को कौन
मिटाए!!
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72 उमरावो के संग कुंवर
ने किया उत्तर दिशा में सूर्य
कुंड की तरफ गमन,
लोहार्गल में ऋषि- मुनि कर
रहे थे हवन,
कुंवर और उमराव डालने
लगे उनके ध्यान में विघ्न,
क्रोध में आकर ऋषियों ने
दिया उन सभी को श्राप,
हो गए सभी जड़ बुद्धि
पाषाण किया जो घोर पाप,
इस दुखद समाचार को सुन
महाराज और 16 रानियों ने
ने दिए प्राण त्याग!!
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कुंवर महारानी और उमरावो
की स्त्रियों ने कि ब्राह्मण देव
से की क्षमा याचना,
ब्राह्मणों ने कहा करो
श्राप से मुक्ति के लिए
भगवान शिव की आराधना!!
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सभी ने मिलकर प्रभु की
साधना और अभिषेक किया,
मां पार्वती के कहने पर
शिवजी ने उन्हें श्राप से मुक्त
किया!!
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हिंसा का कर त्याग
छत्रिय धर्म छोड़, वैश्य धर्म
को अपनाया,
तलवार की लेखनी, भालों की
डांडी और ढाल तराजू
बन गई और व्यापार को
अपना धर्म बनाया ,
भगवान महेश के आशीर्वाद
से माहेश्वरी वेश्य नाम
पाया!!
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उमराव बने 72 माहेश्वरी
खाप राजकुमार जागा
कहलाए,
भगवान महेश के आशीर्वाद
से हम माहेश्वरी कहलाए!!
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गर्व है हमें हम भगवान महेश
की संतान,
जय उमा महेश करते हैं
निश दिन गुणगान!!
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संध्या माहेश्वरी 🙏
बहुत शानदार एवं उपयोगी जानकारी
ReplyDeleteमाहेश्वरी की उत्पत्ति के बारे में बहुत सुन्दर जानकारी
ReplyDeleteबहुत बडिया 👍👍