गणगौर के छोटे दोहे(गणगौर गीत एवं दोहे) by-Sandhya Maheshwari
🌼गणगौर के छोटे दोहे -5🌸
१ चैत का महीना आया आई गणगोर,
साजन जी के साथ जुड़ी मेरी जीवन डोर!!
२. सोलह श्रृंगार से सजी है सुहागन,
साजन जी से जुड़ा है प्रीत का बंधन!!
३. काजल, कंकू मेहंदी रचे हाथ,
गणगौर पूजू साजन जी के साथ!!
४. इसरगोरा से पाया वरदान,
साजन जी ने कुमकुम से भरी मेरी मांग!!
५. बनडे के संग जचती है बनड़ी,
मै ओढु साजन जी के नाम की चुनरी!!
६. घेवर, मांडी और फल का भोग लगाऊं,
मै साजन जी की अर्धांगिनी कहलाऊं!!
७. बोए जवारे गाए मंगल गान,
साजन जी मेरे ,मेरा अभिमान!!
८. रंगों से सजी है सुंदर तस्वीर,
साजन जी के संग जुड़ी मेरी तकदीर!
९. बड़ों के स्नेह और साजन जी के प्रेम की छाया में बीते हर शाम,
सभी सखियों को गणगौर की राम- राम!!
१०. चैत का महीना नई उम्मीदें लेकर आया,
संवर गई मेरी दुनिया साजन जी जैसा जीवन साथी पाया!!
🌼 गणगौर के छोटे दोहे-6 🌸
१. वक्त जाओ थोड़ा सा ठहर,
कभी ना गुजरे यह प्यार का पहर,
मुझे आते है चांद में भी साजन जी नजर!!
३. बरसात में जब आएगा सावन का महीना,
साजन को बना लूंगी अंगूठी का नगीना!!
२. कोई पहने मूंगा, कोई पहने मोती,
में तो पहनूं साजन जी के नाम की अंगूठी!!
४. गणगौर के त्योहार पर बोऊ हरिया जवारा,
सजनजी लगे मने सबसे प्यारा!!
५. ईसर जी के आगे दोनों जोडू दोनों हाथ,
साजन जी के साथ रहे अखंड सुहाग!!
६. कह दो एक बार साजन,
मुझसे है प्यार साजन!!
७. सोऊ तो साजन सपनों में सजे है,
जागु तो साजन नैनों में घूले हैं,
लाख चाहूं की कुछ पल भूल जाऊं ,
पर वो तो मेरे रोम- रोम में बसे हैं!!
८. क्या कहूं केसे नाम लूं मुझे शर्म आती हैं,
साजन मेरे जनम -जनम के साथी है!!
९. ऐसी कोई सुबह नहीं ऐसी कोई शाम नहीं,
साजन जी का नाम लेने के सिवा मुझे कोई काम नहीं!!
१०. दिन गया रात हुई बीते दिन इंतजार के,
साजन जी संग फेरे हुए आए दिन बहार के!!
Sandhya Maheshwari
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